हमसे पहचानने में भूल हुई, ये ग़ुनाह क्यों कर बैठे,
जिन्हें चाहा था जान से बढ़कर, वो तबाह मुझे कर बैठे |
कर गया था दिल नादानियाँ, मन बहक गया था मेरा,
जज़्बातों में फिसल गयी थी, तन भटक चला था मेरा |
तन मन तुझको सौंप दिया था, भगवान बना कर रखा था,
पर तूने तो उस मनमंदिर में, शैतान बसा कर रखा था |
छोड़ चला मुझे दोराहे पर, तोड़ चला वो कसमें वादे,
हाँ पहचानने में भूल हुई, नहीं जान सकी वो तेरे इरादे |

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