आज महिला दिवस हे
सोच रहा हु क्या लिखु,
उस महिला पर
जिसने मुझे जन्म दिया
जिसे मैं माँ कहता हुं,

या उस पर जो मेरी बहन हे
मेरी हर काम मे मेरे साथ
मेरी खुशियों पर मेरे साथ हे,
या उस पर जो मेरी बहन तो नही
पर दिख जाये वो कही तो
छेडने मे हम कम नही,

या उस पर जो
बनकर आयी भाभी हे
स्वर्ग सा घर को बनायी हे
या उस पर जो रहती
पडोस मे अभागी हे
जिसे करने परेशान
पुरा मोहल्ला सहभागी हे,

या लिखु उस पर
जो हमराही बनकर
मेरे घर आयेगी,
अपनो को छोड परायो संग
परिवार बनायेगी
या लिखु उस पर
जो चन्द लालची हाथो मे आकर
दहेज की सुली पर चढ जायेगी,

या फिर लिखु उस पर
जो पैदा होने से पहले ही
कोख मे मार दी जायेगी,
और हो गयी पैदा तो
चन्द रूपयो की खातिर
बाजार मे बेच दी जायेगी,
बिककर ये अपने
हुस्न की रंगत
बाजार मे फैलायेगी,

या फिर लिखु उस पर
जो बाली उमर मे
भेडिये की शक्ल मे छुपे
पुरूष की हवस की भुख बन जायेगी,

क्या लिखु सच मे समझ नहीं आता
कब हर नारी इस देश की सम्मान पायेगी

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