कुछ साथी सफ़र में छूट गए, मेरे अपने रूठ गए

कुछ साथी सफ़र में छूट गए, मेरे अपने रूठ गए,
साथ बुने थे साथ बैठकर, वो सुंदर सपने टूट गए |
वादा किया था सदियों का, मिलकर साथ बिताएंगे,
बिना एक दूजे के एक भी पल, हम नहीं रह पाएंगे |
जाने कैसा मोड़ वो आया, जो वो मुझको छोड़ गया,
कोमल कोमल मेरे ह्रदय को, कांच की मानिंद तोड़ गया |

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Rahi Mastana

Part time writer/Author/Poet

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