घर की जिस चीज़ से मोहब्बत है, वो है मेरा अपनापन,
किलकारी गूंजे वहाँ, जहाँ बच्चों का है प्यारा बचपन |
जब भी काम से मैं लौटूं, बच्चे को चिपकाता हूँ ख़ुद से,
खिलखिलाहट देख के उनकी, दूर थकान को पाता हूँ ख़ुद से |
मन रोमांचित हो उठता है, देख बीबी की नज़रों को,
बाट जोहती रहती है जो, देखने प्रियतम के चेहरे को |
अनुभव सुखद मिलता है, जब माँ-पापा से बतियाता हूँ,
आँखों से सुकून टपकता है, जब भाई-बहनों से मिल आता हूँ |
घर स्वर्ग से सुंदर लगता है, हर कोना अच्छा लगता है,
ऐसे भरे परिवार में मुझको, हर कोई सच्चा लगता है |

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