ये वक्त जो ग़म का है गुजर जाएगा ।
वो शख्श मेरे दिल से अब उतर जाएगा।।

अहबाब जो बना फिरता था मेरा
वो मेरा था! ये भरम अब निकल जाएगा ।।

मुझे शिकवा नही किसी दोस्त से अपने।
आज उसका है कल मेरा भी टाइम आएगा।।

रोजे बद का दौर है कभी तो आना ही था।
आज मैं फर्श पर हूँ कभी वो भी आएगा।।

यूँ छुपकर सजा देने वाले सामने तो आ ।
ये वो परवाना है जो शमा में फना हो जाएगा।।

पंछियों से भरा रहता था शज़र जो,
सूखकर वो पेड़ भी अब गिर जाएगा ।।

कोशिशें कर रहा हूँ अभी कतरों को जोड़ने की
ये मकाँ जो है कभी महल भी बन जायेगा ।

पर वो शख्श मेरे दिल से अब उतर जाएगा।।

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