उपहार

महिला दिवस के दिन खुद को स्थापित करने की कोशिश में लगी महिलाओं को सम्मानित किया गया ‘सखी स्वावलंबन विला’ में. चार साल पहले गोद में अपना छोटा सा बच्चाखिलाती शाम्भवी के सपने उडान भरने में मशगूल थे कि पति के असमय देहांत ने सब तहस-नहस सा कर दिया, आगे का जीवन उसे सूझ ही नहीं रहा था. शाम्भवी के ससुर जी ने उस समय उसे अपना हुनर निखार बेकरी का काम शुरू करने को प्रेरित किया. इस सफर में चली तो अकेली थी लेकिन उसके द्वारा स्थापित की गई ‘सखी स्वावलंबन विला’ में आज सौ से भी ज्यादा महिलाएं अपने हुनर को निखार व्यवसाय का रूप देने में लगी हैं जिन्हे शाम्भवी का साथ, प्रेरणा और सान्निध्य प्राप्त है.

कार्यक्रम की थकान से आँखों पर नींद-सी छाई थी. घर पहुँची तो शाम हो चुकी थी. घर में अंधेरा देख शाम्भवी के कदम ठिठक गए, लेकिन अगले क्षण घर में कदम रखते ही सारी बत्तियाँ जगमगा उठी. हर तरह से उसकी पसंद की सजावट, फूल, झालरें, मिठाईयाँ… बेटा शुभ अपने दादाजी के साथ सफेद फूलों का गुच्छा लिए खडा था और उसपर लिखा एक लिफाफा- “हमारी दुनिया तुमसे शुरू और तुम्ही पर खतम है. दुनिया की सबसे प्यारी और मजबूत माँ और बेटी को महिला दिवस की शुभकामनाएं.”

आँखें भर आईं उसकी. वास्तव में इस उपहार ने महिला दिवस को सार्थक कर दिया.

-आकांक्षा ‘मधुर

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