सुना है

सुना है

सुना है,
पढ़े लिखे अनपढ़ों के चुनाव होने वाले हैं .
फिर से ,
हरे वो घाव होने वाले हैं।
वो बैठे रहते है
कुर्सियों में आराम से,
उन्हें क्या पता
गायब सब गाँव होने वाले हैं.
वो फिर से
छेद हुई नाव होने वाले हैं ,
सुना है
पढ़े लिखे अनपढ़ों के चुनाव होने वाले हैं .
रो रहा है बुढ़ापा
पहाड़ों में अकेले ,
वो नारियल के पेड़ सी
छाँव होने वाले हैं.
दिल दुखता है
सुनकर खैरी उन पहाड़ों की,
जो शीश हुआ करते थे
पाँव होने वाले हैं.
दुःख होता है सुनकर
की चुनाव होने वाले हैं।

संजीत रावत

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