बर्बाद हुआ हूं इश्क़ में ए गम नही
इस शायर-ए-प्रेम की हिम्मत तो देखिए।

मैं न गालिब हूं न हूं शमशेर फिर
भी मेरी शायरी में नादानी तो देखिए।

फटेहाली में जीना बेहाल था मगर
फिर भी चाय की चुस्की को देखिए।

जबसे कवियों की होड़ लग गयी शहर
में कस्बों में लौकी की कीमत तो देखिए।

वर्षों से जिस जमीन को अपना कहा मैंने
सरकार की नीतियों पर गौर कर के देखिए।

सबकी असलियत को पहचानते हैं बखूबी
मगर मैं कचहरियों का तेवर तो देखिए।

भाषण और अस्वासन की झड़ियां लगी है
अब आगे – आगे इनकी करनी को देखिए।

जनसंचार पर मन की बात को सुनिए
इस गर्मी में इनके पसीने तो देखिए।

लोग बे मौत मरते जा रहे हैं
अमीरों की जरूरतों को देखिए।

डाकुओं को सरताज पे बिठा रखा है
कस्बों में इनकी सोहरत तो देखिए।

हवालात में मुसीबतें बहुत थे
सांसद में नेता जी को देखिए।

शब्दों को आग में सुलझाकर मैंने कलम
को तपाया अब कागज की शराफत तो देखिए।

दर्द बहुत है सीने में मगर मेरी हिम्मत
तो इन कोरे कागज को सहते हुए देखिए।

प्रेम प्रकाश

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