सफ़र वक़्त का यूँही चलता रहेगा
मुठ्ठी से लम्हा फिसलता रहेगा।

अज़गर का कद हो चाहे कितना भी बौना 
बेबस उसका निवाला बनता रहेगा।

कटु शब्दों की आँधी थम जाए लेकिन
उपेक्षा का दंश रोज चुभता रहेगा।

ज़माने के डर से रोता नही हूँ 
मगर मन का बालक सिसकता रहेगा।

जलाओ अनंत तक “रावण “की लाशें
“सीता” को फिर भी हरता रहेगा।

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