मेरी रूह में

मेरी रूह में वो इक घर कर गया है ,
दिल को प्रेम का समंदर कर गया है।
अच्छा लगता है तारों से बात करना
कुछ ऐंसा वो मेरे अंदर कर गया है।
गुदगुदी सी होती है अब जजबातों में मेरे
मंज़िल को मेरी सफर कर गया है,
हर इंसान में वही दिखता है अब,
कुछ ऐंसी मेरी नज़र कर गया है।
सोचता था दुनिया में मिलेंगे बहुत से
वो मुझमे खोने का डर कर गया है,
महोबत मुकम्मल हो जरुरी तो नहीं
वो मीरा सा प्रेम में तर कर गया है।
उजड़ा सा था गाँव मेरी ख्वाहिशों का
उसको सजा कर शहर कर गया है,
उसकी मुस्कुराहट कुछ ऐंसे बसी है सीने में
मेरी मंज़िल को भी वो सफर कर गया है।

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