घुमते फिरते है…

घुमते फिरते है…

घुमते फिरते है हम दरबार लिए
साथ चलते है हम घरबार लिए

गुजर रही है ज़िंदगी व्यस्त दौरे में
चल रहे है हाथों मे कारोबार लिए

वो जो खबरें बता रहा है दुनियां की
हाथ मे देखो बैठा है अखबार लिए

वो दान दाता नही जो तुम्हें पैसे देगा
चाहता तख्त या मुट्ठी में सरकार लिए

जरा बुद्धि लगाओ वहम मे रहना मत
तुम्हारे पास वो आया है दरकार लिए

तुमने समझा वो तुम्हारा भला चाहेगा
मगर वो आएगा अपना ही सरोकार लिए

भीड़ मे बैठा धरने मे खांसता है कोई
देशद्रोही की फाँसी का बहिष्कार लिए

तुमको लगता है कि वो तुम्हारा हक देगा
छीनना चाहता है जो हो तुम अधिकार लिए

फरेब है बहुत सियासतों के पंजों में
बरूद है संभल के रहना अपना प्यार लिए

नफरतें आग उगलती है हम बुझाते है
खिजा के दौर मे चलते है हम बहार लिए

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