मैं जानती हूं मैं क्या हूं

मैं जानती हूं मैं क्या हूं

हवा हूं
पानी हूं
प्रकृति हूं
धरती हूं
आकाश हूं
पाताल हूं
मुझे मालूम है
मैं जानती हूं
मैं क्या हूं
झरना हूं
पहाड़ हूं
मैं वों हूं
जिसे देखने के लिए तुम सब
अक्सर आते हों मैं जितना जनती हूं
तुम खुद के बारे में नही जानते होगें।
खुद में मैं खुश रहती हूं
खुद से ज्यादा तुम्हे खुश रखती हूं
मैं जानती हूं मैं क्या हूं।।

प्रेम प्रकाश

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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