काश जान पाता कोई इस जिंदगी को
कि इसमें कितनी गहराईयाँ हैं ।

हम देखते हैं जिंदगी को बहुत दूर से
ये दूरी इस जिंदगी को बड़ी सुन्दर बना देती हैं
काश देख पाता कोई इस जिंदगी को करीब से
कि इसमें कितनी सच्चाईयाँ हैं ।
काश जान पाता कोई इस जिंदगी को
कि इसमें कितनी गहराईयाँ हैं ।

जिंदगी बड़ी अज़ीब हैं
ये हर रोज अपना नया रूप दिखाती हैं
पता भी नहीं चलता कब हमें
अनजान मोड़ पर लाती हैं
काश जान पाता कोई इस महफ़िल को
कि इसमें कितनी तन्हाईयाँ हैं ।
काश जान पाता कोई इस जिंदगी को
कि इसमें कितनी गहराईयाँ हैं ।

मैं हर रोज मंजिल कि तलाश में निकलता हूँ
छांव को छोड़कर कड़ी धूप में चलता हूँ
राह में जो कोई भी मिलता हैं मैं उससे पूछता हूँ
“जिंदगी क्या चीज हैं”
उत्तर मिलता हैं “जिंदगी बड़ी अजीब हैं,
इसे जानने कि ना कोई तरकीब हैं”
मैं फिर से वही सोचता हूँ कि
काश जान पाता कोई इस जिंदगी को
कि इसमें कितनी गहराईयाँ हैं ।।

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