बात आज की नहीं
कुछ समय पुरानी बताऊँगा
जो मुझ पर बीती वो कहानी सुनाऊँगा
जब मैं गया एक सरकारी कार्यालय में
तो वहां का बड़ा विचित्र नजारा था
मुझे लगा जैसे सट्टे बाजार के
सटोरियों का जमावड़ा था
जब मैंने उनको देखा तो वे
बड़ी खुशी से रिश्वत के रुपए
आपस में बांट रहे थे
जब उनकी दृष्टि मुझ पर पड़ी
तो जैसे मैं उम्रकैद की सजा पाया हुआ
कैदी हूँ ऐसे मुझे घूर रहे थे
फिर भी गया अंदर हिम्मत करके
क्योंकि मेरी समस्या मुझे यहां लाई थी खींचकर के
वो हमारे बिजली विभाग का कार्यालय था
मुझे यहां आना पड़ा क्योंकि मेरे घर के
दो महीने के राशन से भी अधिक आया
वो मेरा बिजली का बिल था
मैंने उनके समक्ष जाकर अपनी समस्या बताई
और कहा महोदयजी मीटर महाराज जितना बता रहे हैं
उससे कहीं ज्यादा आप क्यों बिल में दिखा रहे हैं ?
आप उचित कार्यवाही करके
मेरी समस्या का समाधान कीजिए
तो उन्होंने कहा या तो बिल का भुगतान कर दीजिए
या फिर अपने घर के लिए
मोमबत्ती और पंखी का इंतजाम कर दीजिए
इसके अलावा एक तीसरा रास्ता यह है कि
हमारी जेबों को गरम कर दीजिए
मैं ठहरा भारत का आम नागरिक
मैंने कहा यह तो गलत बात है
रिश्वत लेना और देना पाप है
मैं ऊपर तक जाऊँगा,
सच्चाई और ईमानदारी से
अपनी समस्या सुलझाऊँगा
यह सुनकर वे आग बबूला हो गए
पहले गुर्रराए फिर हँस कर बोले
हमसे ऊपर वालों के पास जाओ
या उनसे भी ऊपर वालों के पास जाओ
कहीं कोई सुनने वाला नहीं होता है
क्योंकि हम जो तुमसे लेते हैं
उसमें उनका भी हिस्सा होता है
यह सुनकर मुझे भी लगा कि
वास्तव में ऐसा ही होता है
तभी तो भारत का आम नागरिक रोता है
तभी मैंने अपने मन से एक सवाल पूछा,
कि यह मैं कहाँ आ गया हूँ
क्या यह वही देश है जहाँ रहते थे
साक्षात भगवान इंसानों के बीच में ?
मेरे मन ने उत्तर दिया हां यह वही देश है,
फर्क सिर्फ इतना है कि अब तुम रहते हो
साक्षात भेड़ियों के बीच में ॥

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