मगज मखाने

मगज मखाने

बहुत सिरिज के रखती थी माँ ||
बरनी में मगज मखाने को ||
गलती से जब गिर जाता था ||
चुगती थी एक एक दाने को ||

कई व्यंजन में उसे मिलाती ||
छप्पन भोग लगाती थी ||
थाल सजा के सुबह शाम नित्य ||
मंदिर में हमेशा जाती थी ||
कटुक बचन कभी न कहती ||
प्रयास था अवगुण भगाने को ||
गलती से जब गिर जाता था ||
चुगती थी एक एक दाने को ||

लड्डू पेड़े बहुत थे बनते ||
दूध दही का रेला था ||
सब लोगो का प्यारा मै था ||
घर में बालक अकेला था ||
संस्कार सौहार्द सिखाती ||
कोशिश करती चमकाने को ||
गलती से जब गिर जाता था ||
चुगती थी एक एक दाने को ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

This Post Has One Comment

  1. हिंदी लेखक परिवार के हम आभारी है / हार्दिक आभार

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