राष्ट्र का नेता कैसा हो?

राष्ट्र का नेता कैसा हो?

राष्ट्र का नेता कैसा हो?
जो रहें लिप्त घोटालों  में,
जिनके चित बसे सवालों में,
जिह्वा नित रसे बवालों में,
दंगा झगड़ों का क्रेता हो?
क्या राष्ट्र का नेता ऐसा हो?

राष्ट्र का नेता कैसा हो?
जन गण का जिसको ध्यान नहीं,
दुख दीनों का संज्ञान नहीं,
निज थाती का अभिज्ञान नहीं,
अज्ञान हृदय में सेता हो,
क्या राष्ट्र का नेता ऐसा हो?

राष्ट्र का नेता कैसा हो?
जो अनसुनी करे फरियादें ,
करता रहे बस खाली वादें ,
हो  नियत नेक ना इरादे ,
कि फ़कत मात्र अभिनेता हो,
क्या राष्ट्र का नेता ऐसा हो?

राष्ट्र का नेता कैसा हो?
निज  परिवार की हीं सोचे,
जन के तन मन धन को नोंचे,
रचते रहे  नित नए धोखे,
क्या कलियुग हो, क्या त्रेता हो,
क्या राष्ट्र का नेता ऐसा हो?

राष्ट्र का नेता कैसा हो?
जो अरिदल का सम्मान करें,
हो राष्ट्र भक्त  अपमान  करे,
औ जाति धर्म  विषपान करे,
जन को विघटित कर देता हो,
क्या राष्ट्र का नेता ऐसा हो?

राष्ट्र का नेता कैसा हो?
चाहे कोई हो मज़बूरी,
जनता से बनी रहे दूरी,
वादें कभी भी ना हों पूरी,
पर वोट नोट से लेता हो,
क्या राष्ट्र का नेता ऐसा हो?

राष्ट्र का नेता कैसा हो?
ऐसों से देश बनेगा क्या?
ऐसों से देश बचेगा क्या?
कोई अब और कहेगा क्या?
जो राष्ट्र मर्म विक्रेता हो,
क्या राष्ट्र का नेता ऐसा हो?

अजय अमिताभ सुमन
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AJAY AMITABH SUMAN

जीवन में बहुत सारी घटनाएँ ऐसी घटती है जो मेरे ह्रदय के आंदोलित करती है. फिर चाहे ये प्रेम हो , क्रोध हो , क्लेश हो , ईर्ष्या हो, आनन्द हो , दुःख हो . सुख हो, विश्वास हो , भय हो, शंका हो , प्रसंशा हो इत्यादि, ये सारी घटनाएं यदा कदा मुझे आंतरिक रूप से उद्वेलित करती है. मै बहिर्मुखी स्वाभाव का हूँ और ज्यादातर मौकों पर अपने भावों का संप्रेषण कर हीं देता हूँ. फिर भी बहुत सारे मुद्दे या मौके ऐसे होते है जहाँ का भावो का संप्रेषण नहीं होता या यूँ कहें कि हो नहीं पाता . यहाँ पे मेरी लेखनी मेरा साथ निभाती है और मेरे ह्रदय ही बेचैनी को जमाने तक लाने में सेतु का कार्य करती है.

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