शहीद का पैगाम

शहीद का पैगाम

माफ करना मुझे मेरी देवी सी मां

जाते जाते ये वादा मैं कर जाऊंगा

ये जनम था मेरा मातृभूमि के लिए

लेके अगला जनम मैं फिर आऊंगा

माफ करना मुझे. . . . . . . . . .

मैं था तेरा दुलारा , पापा का रतन

जान देकर बचाया है अपना वतन

आंसुओं से ये दामन भिगोना नहीं

जननी हो वीर की तुम रोना नही

जाते जाते वतन की हर एक आंख को

आंसुओं से सराबोर मैं कर जाऊंगा

माफ करना मुझे. . .

बहना नैनों को बिल्कुल भी करना न नम

है कलाई के धागे की तुझको कसम

भाई छोटा है सबका दुलारा है तू

मम्मी पापा का अब अंतिम सहारा है तू

परिवार को ये मेरी कमी न खले

तो ही चैनोसुकूं से मैं मर पाऊंगा

माफ करना मुझे. . .

तुम भी करना मुझे माफ मेरी प्रिया

तुमसे जो था वो वादा निभाया नहीं

न था मेरा इरादा यूं छोड़ जाने का

क्या करूं मैं है ईश्वर की माया यही

आके अगले जनम फिर तेरा रहूंगा

चांद तारों से ये मांग भर जाऊंगा

माफ करना मुझे. . .

मेरे बच्चों सदा तुम फलते ही रहो

रास्ते पर उन्नति के चलते ही रहो

दादा की लाठी दादी का नयनतारा बनना

मेरा बाद पूरे घर का मजबूत सहारा बनना

देखेगी ये दुनिया तुम्हे इज्जत की नजर से

डाल सबपे मैं ऐसा असर जाऊंगा

माफ करना. . .

विक्रम कुमार

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