सारी जन्नतें तेरे साथ हों!

सारी जन्नतें तेरे साथ हों!

सारी जन्नतें तेरे साथ हों…

इंतजार इश्क का,
सबसे खूबसूरत सजा,
और मिलन,
तेरी यादों का,
दिल में बहता समंदर।

इस सर्द चांदनी रात,
बस मैं, और तुम!
तेरी गर्म हथेलियों के बीच,
उग आया जैसे,
आशा का नन्हा सा पौधा।

नर्म मुलायम पत्तियों के नीचे,
था असीम,
नए जीवन का आधार,
और था जैसे,
जीवनीशक्ति का संचार।

जड़ हुए लब,
खामोश लफ्ज हैं,
छलके,
मिलन की खुशी,
झलके, अनकहे अर्थ हैं।

तेरी आंखों में ही देखूं,
नित नई आस,
नया सवेरा,
चलूं तेरे साथ सदा,
पथ पर जीवनसंगिनी बन।

जीवन की जब,
यह सांझ ढले,
मैं, मैं ना रहूं!
जो भी है मुझमें,
सब तुझमें समा जाऊं।

बस सारी जन्नतें तेरे साथ हों…

–  मनु वशिष्ठ

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