आम फेरि बौर गये

आम फेरि बौर गये

गर्मिन की ऋतुअन मैं,
अब आमन के राज भये।
आम्र तरु सज धज के,
एक नओ रूप पाय लौ।
आम फेरि बौर गये।।
काली घटा घट-घट के,
निचुक-निचुक बरसाए गई।
आम्र देखे उनकौ तौ,
थोरो-थोरो घबराए गये।
आम फेरि बौर गये।।

शीतलिया पवन चली,
भौंर तौ लहराए गये।
लहराये गये पत्तौं कौ,
थोरे बहुत गिराये गये।
आम फेरि बौर गये।।

थोरे-थोरे छोटे हे,
लटकनियां बजाये रहे।
थोरे-थोरे बड़े भए,
बचे खुचे टपक गए।
आम फेरि बौर गये।।
पत्ते तौ पत्ते संग,
देखो कैसे डोल रहे।
देखै अपनी डलियन पै,
झूम-झूम झूम रहे।
आम फेरि बौर गये।।
बाल सारे मस्तिन मैं,
देख-देख हार गए।
झुके-झुके तोड़ लए,
ऊँचे-ऊँचे छोड़ दए।
आम फेरि बौर गये।।
और भई गर्मी तौ,
चित्तियाँ पड़न लगी।
तितली मधुमक्खी सब,
उनकी ख़ुशबू सूँघ रहे।
आम फेरि बौर गये।।

अमिया तौ हर्षित भई,
अब हमारे ठाठ भए।
सभी फल तौ फल ही रहे,
और हम सबन के राजा भए।
आम फेरि बौर गये।।

–  सर्वेश कुमार मारुत

Rating: 3.7/5. From 3 votes. Show votes.
Please wait...

SARVESH KUMAR MARUT

सर्वेश कुमार मारुत पिता- रामेश्वर दयाल पता- ग्राम व पोस्ट- अंगदपुर खमरिया थाना- भुता तहसील- फरीदपुर बरेली 243503

This Post Has One Comment

  1. Sundar rachna, khoobsurat bhav

    No votes yet.
    Please wait...

Leave a Reply

Close Menu