वो हमें नसीहत ये दे रहे
कि हम पीना छोड़ दे,
अरे इससे बेहतर तो वो हमें
ये कहते कि हम जीना छोड़ दे ।

वो कहते हैं कि पीने के बाद
तुम्हें होश नहीं रहता हैं,
हमने कहा कौन कम्बख्त
होश में रहना चाहता हैं?

उन्होने कहा कि मुझे भूला दो
अब मैं किसी और की अमानत हूँ,
हमने कहा वो तो हम कब के कर चुके
अब तो मैं खुद, खुदा कि इनायत हूँ।

उन्होने कहा मुझे भुलाने में
कोई तकलीफ तो नहीं हुयी?
हमने कहा बस ज्यादा नहीं,
दिल को जिस्म से अलग करे उतनी हुयी।

उन्होने कहा क्यों अब भी
मुझे आँसुओ से रूलाते हो?
हमने कहा अपनी बेवफाई का
इल्जाम भी हम पर लगाते हो?

उन्होने कहा वो मेरी बेवफाई
नहीं मेरी मजबूरी थी,
हमने कहा कभी सोचा भी,
कि हम पर क्या गाज़ गिरी थी?

उन्होने कहा हमने कई दफें
आपको पैगाम भिजवाए थे,
हमने कहा तो क्या उन्हें
रास्ते ही खा गये थे?

उन्होने कहा ये सारे सितम
हम पर जमाने के हैं,
हमने कहा हमारे दिल को
बहलाने के अच्छे बहाने हैं।

उन्होने कहा आज मेरी आँखे
आँसुओ से भर आयी हैं,
हमने कहा आपको क्या पता,
हमने आँसुओ की कितनी नदियाँ बहाई हैं?

उन्होने कहा हमारी हर
एक बात में सच्चाई हैं,
हमने कहा हमने भी झूठ ना
बोलने की कसम खाई हैं।

उन्होने कहा मेरे सुखी जीवन में
अब आग ना लगाना,
हमने कहा शमा भला कब जली
जलता तो हैं बस परवाना।

उन्होने कहा सब कुछ भुला कर
अपनी नई दुनिया बसाओ,
हमने कहा अब कम से कम
जले पर नमक तो ना लगाओ।

उन्होने कहा मुझसे अच्छी
तुम्हे हजार मिलेगी,
हमने कहा उन हजार में भी
तुम्हारी कमी खलेगी।

उन्होने कहा इस जन्म में तो तुम्हें
जुदाई का गम सहना पडेगा
हमने कहा सात जन्मो बाद भी ना मिले तो
खुदा को आंठवा जन्म भी देना पडेगा।।

– विनोद जैन

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