कवियों की कल्पना का |
कोई नहीं है छोर ||
उनकी मशीनरी का ||
कोई नहीं है तोड़ ||

पातळ में पहुंच कर ||
बीज को उगाते है ||
अम्बर को छेद करके ||
बूँद को गिराते है ||
शब्दों से सधी कलम का ||
कोई नहीं है मोल ||
उनकी मशीनरी का ||
कोई नहीं है तोड़ ||

जहाँ पवन की गम नहीं ||
रवि शशि उदय न होय ||
वहा पहुंच कविराज जी ||
जाते कविता में खोय ||
उनके गुणन खण्ड का ||
कोई नहीं है जोड़ ||
उनकी मशीनरी का ||
कोई नहीं है तोड़ ||

– शम्भू नाथ कैलाशी

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One Comment

  1. कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़

    हिंदी लेखक परिवार के हम आभारी है / हार्दिक आभार

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