गुजर रही हैं उम्र,पर

जीना अभी बाकी हैं

जीन हालातों ने पटका है जमीन पर,

उन्हें उठकर जवाब देना अभी बाकी हैं।

चल रहा हूँ मन्जिल के सफर मैं,

मन्जिल को पाना अभी बाकी हैं,

कर लेने दो लोगों को चर्चे मेरी हार के,

कामयाबी का शोर मचाना अभी बाकी हैं।

वक्त को करने दो अपनी मनमानी,

मेरा वक्त आना अभी बाकी है,

कर रहे है सवाल मुझे जो loser समझ कर,

उन सबको जवाब देना अभी बाकी हैं।

नीभा रहा हूँ अपना किरदार जिदंगी के मंच पर

परदा गीरते ही तालीयाँ बजना अभी बाकी हैं,

कुच नहीं गया हाथ से अभी तो,

बहुत कुछ पाना बाकी हैं…! ! ! !

✍️Praveen Kumar

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *