सच कहानी दीवारों में चुनवाई जाएगी,
अपनी तारीफें फकीरों से गवाई जाएगी।
जो कच्चे मकान में बारिश में रहता है,
उसी से यह इमारत बनवाई जाएगी।
आसमां से उतरती रहे खौलती आफत,
हर आग यहां पसीने से बुझाई जाएगी।
चलो हो गया रोटी का जुगाड़ आज का,
कल फिर ये किस्मत आजमाई जाएगी।
कहीं मशरूफ हो गया है ये तमाम शहर,
यह कहानी फिर कभी सुनाई जाएगी।

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2 Comments

  1. Vishal Kashyap

    हिंदी लेखक परिवार को बहुत –बहुत धन्यवाद।

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  2. NIKITA KUMARI

    वाह, ऐसे ही अपनी लेखनी का चमत्कार बनाये रखे।

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