विडंबना

विडंबना

सच कहानी दीवारों में चुनवाई जाएगी,
अपनी तारीफें फकीरों से गवाई जाएगी।
जो कच्चे मकान में बारिश में रहता है,
उसी से यह इमारत बनवाई जाएगी।
आसमां से उतरती रहे खौलती आफत,
हर आग यहां पसीने से बुझाई जाएगी।
चलो हो गया रोटी का जुगाड़ आज का,
कल फिर ये किस्मत आजमाई जाएगी।
कहीं मशरूफ हो गया है ये तमाम शहर,
यह कहानी फिर कभी सुनाई जाएगी।

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Vishal Kashyap

विशाल कश्यप पुत्र श्री रमाकांत, गंज मुरादाबाद , जिला –उन्नाव, उत्तर प्रदेश

This Post Has 2 Comments

  1. हिंदी लेखक परिवार को बहुत –बहुत धन्यवाद।

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  2. वाह, ऐसे ही अपनी लेखनी का चमत्कार बनाये रखे।

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