ईश्वर की राह

ईश्वर की राह

कितना सरल है,
सच?

कितना कठिन है,
सच कहना।

कितना सरल है,
प्रेम?
कितना कठिन है,
प्यार करना।

कितनी सरल है,
दोस्ती,
कितना मुश्किल है,
दोस्त बने रहना।

कितनी मुश्किल है,
दुश्मनी?
कितना सरल है,
दुश्मनी निभाना।

कितना कठिन है,
पर निंदा,
कितना सरल है,
औरों पे हँसना।

कितना कठिन है,
अहम भाव,
कितना सरल है,
आत्म वंचना करना।

कितना सरल है.
बताना किसी को,
कितना मुश्किल है,
कुछ सीखना।

कितना सरल है,
राह प्रभु की?
कितना कठिन है,
प्रभु डगर पे चलना।

अजय अमिताभ सुमन
सर्वाधिकार सुरक्षित

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AJAY AMITABH SUMAN

जीवन में बहुत सारी घटनाएँ ऐसी घटती है जो मेरे ह्रदय के आंदोलित करती है. फिर चाहे ये प्रेम हो , क्रोध हो , क्लेश हो , ईर्ष्या हो, आनन्द हो , दुःख हो . सुख हो, विश्वास हो , भय हो, शंका हो , प्रसंशा हो इत्यादि, ये सारी घटनाएं यदा कदा मुझे आंतरिक रूप से उद्वेलित करती है. मै बहिर्मुखी स्वाभाव का हूँ और ज्यादातर मौकों पर अपने भावों का संप्रेषण कर हीं देता हूँ. फिर भी बहुत सारे मुद्दे या मौके ऐसे होते है जहाँ का भावो का संप्रेषण नहीं होता या यूँ कहें कि हो नहीं पाता . यहाँ पे मेरी लेखनी मेरा साथ निभाती है और मेरे ह्रदय ही बेचैनी को जमाने तक लाने में सेतु का कार्य करती है.

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