राजनीतिक व्यंग

राजनीतिक व्यंग

कुछ लोगो को कहा गया है ||
जा करके अब आराम करो ||
उम्र बढ़ी है चढ़ गया बुढ़ापा ||
अब तो दादा विश्राम करो ||

छोड़ो झंझट कुर्सी का अब ||
हम लोगो को चढ़ने दो ||
अभी सितारे बुलंद हुए है ||
अब तो आगे बढ़ने दो ||
कंठी पहनो माला ले लो ||
राजनीति का त्याग करो ||
उम्र बढ़ी है चढ़ गया बुढ़ापा ||
अब तो दादा विश्राम करो ||

अपमान नहीं हम करते है ||
न अपयश मुझपे थोपा जाये ||
राजनीति का यही नियम है ||
गलत नियमो को रोका जाये ||
हमें शिखर को फिर छूने दो ||
समय नहीं बेकार करो ||
उम्र बढ़ी है चढ़ गया बुढ़ापा ||
अब तो दादा विश्राम करो ||

पड़ा विपक्ष वैसे पीछे है ||
आप न पीछे पड़ जाना ||
मान सम्मान बना रहेगा ||
कभी कबार तो आ ही जाना ||
तीन तड़ाका अब हमें करने दो ||
हे बुढऊ न तकरार करो ||
उम्र बढ़ी है चढ़ गया बुढ़ापा ||
अब तो दादा विश्राम करो ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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