शहर से बढ़िया गाँव

शहर से बढ़िया गाँव

शहर से बढ़िया गाँव

शहर छोड़ कर हम घर को चले है ||
यहाँ पर तो यारो प्रदूषण बड़े है ||

है दूषित दिशाएँ जहर कुल है फैला ||
बिमारी का प्रभाव बढ़ गया गहरा ||
मौत के मुहाने पर यहाँ हम खड़े है ||
यहाँ पर तो यारो प्रदूषण बड़े है ||

पेड़ो के पत्ते हुए बिल्कुल काले ||
पीने के पानी के पड़े यहाँ लाले ||
अमीरो के नखरे यहाँ पर पड़े है ||
यहाँ पर तो यारो प्रदूषण बड़े है ||

भ्रष्टाचारियो का यहाँ है ठिकाना ||
चमचो दलालो का है आना जाना ||
घूंसखोरियो से हम भी लड़े है ||
यहाँ पर तो यारो प्रदूषण बड़े है ||

परवाह रिश्तो की यहाँ नहीं होती ||
लालच में अपने ही कर देते बोटी ||
मतलबी को हमने भी थप्पड़ जड़े है ||
यहाँ पर तो यारो प्रदूषण बड़े है ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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