कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध

कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध

नवगीत (कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध)

सुन ओ भारतवासी अबोध,
कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध?

आये दिन करता हड़ताल,
ट्रेनें फूँके हो विकराल,
धरने दे कर रोके चाल,
सड़कों पर लाता भूचाल,
करे देश को तू बदहाल,
और बजाता झूठे गाल,
क्या यही तेरा है आत्म-बोध,
कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध?

क्या व्यर्थ व्यवस्था के ये तंत्र,
चाहे रोये लोकतंत्र,
पड़े रहे क्या बंद यंत्र,
मौन रहें क्या जीवन-मंत्र,
औरों के हित तो केवल व्यर्थ
उनके दुख का भला क्या अर्थ,
कर स्व जाति, धर्म, दल कृतार्थ,
पूरे करता अपने ही स्वार्थ,
क्या बस तेरा यही प्रबोध,
कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध?

चाहे बच्चे ढूंढ़ें कचरे में जीविका,
झुग्गी, झोंपड़ झेलें विभीषिका,
नारी होती रहे घर्षिता,
सिसके नैतिकता, मानवता,
पर तेरी आँखें रहेंगी बंद,
बुद्धि तेरी पड़ जाती कुंद,
भूल गया क्या सब अवरोध,
कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध?

हक़ की क्या है यही लड़ाई,
या लोकतंत्र की है तरुणाई,
या तेरी अबतक की कमाई,
क्या स्वतंत्रता यही विचार की,
या पराकाष्ठा अधिकार की,
क्या यही सीख है संस्कार की,
या अति है उदण्ड व्यवहार की,
क्या यही तेरी अबतक की शोध,
कहाँ गया सच्चा प्रतिरोध?

बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’
तिनसुकिया

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Basudeo Agarwal 'Naman'

नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; निवास स्थान - तिनसुकिया (असम) रुचि - काव्य की हर विधा में सृजन करना। हिन्दी साहित्य की हर प्रचलित छंद, गीत, नवगीत, हाइकु, सेदोका, वर्ण पिरामिड, गज़ल, मुक्तक, सवैया, घनाक्षरी इत्यादि। हिंदी साहित्य की पारंपरिक छंदों में विशेष रुचि है और मात्रिक एवं वार्णिक लगभग सभी प्रचलित छंदों में काव्य सृजन में सतत संलग्न हूँ। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। whatsapp के कई ग्रुप से जुड़ा हुआ हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। इसके अतिरिक्त हिंदी साहित्य की अधिकांश प्रतिष्ठित वेब साइट में मेरी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। सम्मान- मेरी रचनाएँ देश के सम्मानित समाचारपत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होती रहती है। हिंदी साहित्य से जुड़े विभिन्न ग्रूप और संस्थानों से कई अलंकरण और प्रसस्ति पत्र नियमित प्राप्त होते रहते हैं। Blog - https:// nayekavi.blogspot.com

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