अलग बात है

अलग बात है

यूँ तो मीत बहुत हैं,
पर मनमीत होना अलग बात है ।।

सरेराह हमदर्दी जताते बहुत है
सच्चा हमदर्द होना अलग बात है ।।

रब की इबादत तो करते है सारे मगर,
रब-मय हो जाना अलग बात है ।।

नाम के राम मिलते है लाखों मगर,
दशरथ -नन्दन होना अलग बात है ।।

हर मोड़ पर है सखा ही सखा,
कृष्ण – सुदामा सा होना अलग बात है ।।

जीते है जीवन सब अपनो के लिए,
गैर पर निसार होना अलग बात है ।।

सुगंध बिखरी है फिजा में अनेकों मगर,
गीली मिट्टी के सोंधेपन की अलग बात है ।।

प्रेम करते है ऐसे तो सभी,
माई री ममता की अलग बात है ।।

घर तो रोशन है सारे यहाँ,
पर बाबुल के आंगन की अलग बात है ।।

मौत आती है इक दिन सभी को मगर,
सरहद पर शहीद होना अलग बात है ।।

– नेहा अवस्थी

Rating: 3.9/5. From 8 votes. Show votes.
Please wait...
Voting is currently disabled, data maintenance in progress.

Golden Ray A Sunahri

-होम्योपैथिक चिकित्सक -रेकी मास्टर -कविता लेखन

This Post Has 2 Comments

  1. Dr.Lalit Upadhyay

    अलग अंदाज बहुत खूब

    Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
    Please wait...
    Voting is currently disabled, data maintenance in progress.
  2. Golden Ray A Sunahri

    धन्यवाद आपका ☺

    Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
    Please wait...
    Voting is currently disabled, data maintenance in progress.

Leave a Reply