गरीबी जब मुस्कुराती है तो अमीरी कांप जाती है,
मजदूर दिन भर नहीं थकता अफसरी हांफ जाती है।

बचाएगा मुसीबत से तेरा तजुर्बा ही जमाने को,
क्या खतरा है बच्चों पर ये चिड़िया भांप जाती है।

तरक्की के लिए सबने जो कुदरत को निचोड़ा है,
शहर कितना भी सुंदर हो एक आंधी नाप जाती है।

उसूलों का नहीं यह तो वसूली का जमाना है,
हरकत कितनी भी गहरी हो रकम सब झांप जाती है।

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