ज़िन्दगी

ज़िन्दगी

मुझे पाने में बस कुछ ही तो दूरी है..
ये खुशी भी दूर तलक फैले आसमां जैसी है..
जो क़रीब है वो दूर नज़र आता है..
जो दूर है उसका असर छा जाता है..
तेरा दीदार ताज जैसा संगमरमरी है..,
सब नज़रों का भरम समझ आता है..
ये फरेबी दुनियां दिखती रंगों से भरी है..
असलियत स्याह-सफेद मिलावट जैसी है..
फिर भी दिल की गठरी अभी आस से भरी है..
तुम हाथ तो बढाओ ज़िन्दगी कह रही है….

आरती ‘अक्स’

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Aarti Human

अब हाल-ए-दिल ना पूँछ कि ताब-ए-बयाँ कहाँ अब मेहरबान ना हो कि जरूरत ना रही....

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