ये किस मोड़ पे जिंदगी ने खड़ा कर दिया
बाली उम्र में हमे तज़ुर्बे से बड़ा कर दिया
उम्र अठखेलियों की न जाने कब बीत गई
नरम हाथों को सलाखों सा कड़ा कर दिया !!

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