जिन्दगी

जिन्दगी

ये किस मोड़ पे जिंदगी ने खड़ा कर दिया
बाली उम्र में हमे तज़ुर्बे से बड़ा कर दिया
उम्र अठखेलियों की न जाने कब बीत गई
नरम हाथों को सलाखों सा कड़ा कर दिया !!

No votes yet.
Please wait...
Voting is currently disabled, data maintenance in progress.

Leave a Reply