दिल्ली की  दिल्लगी

दिल्ली की दिल्लगी

हे दिलदार मेरे दिल्ली में मिलना॥
दिल की बात बता दूगी॥

अपने दिल्ली की प्यारी बगिया को॥
एक बार तुम्हे तो दिखा दूगी॥

तेरे संग मेट्रो में चढ़ करके ॥
पूरी दिल्ली घूमूगी॥

तेरी बाहों में हंस हंस करके ॥
इंडिया गेट पे झूलू गी॥

उसी चर्चा के दरम्यान तुम्हे॥
अपना तुम्हे बना लूगी॥

हे दिलदार मेरे दिल्ली में मिलना॥
दिल की बात बता दूगी॥

दिल्ली में दिल बिक जाता है॥
टूट जाते है दिल के तार॥

एक बार हवा लग जाने दो॥
फिर पूछूगी तुमसे हाल॥

तेरी अरमानो की बगिया में॥
अपनी धाक जमा दूगी॥

हे दिलदार मेरे दिल्ली में मिलना॥
दिल की बात बता दूगी॥

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

This Post Has 2 Comments

  1. hardik abhaar hindilekhak parivar ko

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  2. धन्यवाद, स्वागत है आपका

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