आइडिया

मेरा एक मित्र अवकाश-प्राप्ति के बाद पहली बार मिलने आया। मैंने पूछा, “कहो, कैसे आना हुआ?”

       वह बोला, “कोई बिजनेस करना चाहता हूँ। उसी संदर्भ में परामर्श लेने आया हूँ कि कौन-बिजनेस कम पूँजी में ज्यादा फायदेमंद होगा?”

       मैंने कहा, “राजनीति में चले जाओ। पूँजी शून्य और फायदा असीम।”

         उसने कहा, “राजनीति के बारे में सोचा तो था, पर एक तो मेरा कोई पॉलिटिकल बैकग्राउंड नहीं है, दूसरे राजनीति में सामान्य जनों के लिए ‘नो वैकेंसी’ है। राजनीतिक क्षेत्र का आधा से ज्यादा स्पेस घाघ नेताओं ने अपने बेटे -बेटियों, भतीजा-भतीजियों, बहू, दामाद आदि के लिए सुरक्षित कर लिया है। बचे हुए स्पेस में अभिनेता, अभिनेत्री, खिलाड़ी, अवकाश -प्राप्त सत्ता-भक्त अफसर कब्जा जमा लेते हैं। सरकार को चाहिए कि सामान्य जनों के लिए राजनीति में भी 10℅ आरक्षण का कानून बनाये।”

           मैंने कहा, “बाबा वाला धंधा अपना लो। इसमें भी बिना पूँजी या कम पूँजी के असीम संपत्ति एवं दैहिक-मानसिक सुख का भारी स्कोप है।”

          “सो तो है, पर इस धंधे में आजकल रिस्क काफी बढ़ गया है। अनेक बाबा जेल चले गये हैं, अनेक जाने वाले हैं।”

            मैंने कहा, “आज ई. बिजनेस का जमाना है। घर बैठे कम पूँजी से लाखों-करोड़ों कमा सकते हो बस स्टार्ट अप अच्छा होना चाहिए। गूगल, फेसबुक, पे टीएम, ओला, फ्लिपकार्ट जैसी अनेक कंपनियों के मालिकों ने अपना बिजनेस एक छोटे-से कमरे से कम पूँजी में शुरू किया था। आज वे अरबों के मालिक हैं।

           “उसके लिए मुझे क्या करना होगा?” उत्सुकता का एक समंदर उसके चेहरे पर लहरा रहा था।

        मैंने कहा, “कुछ नहीं, बस नया आइडिया चाहिए। आज हमारे देश के लोग या तो शारीरिक रूप से बीमार हैं या मानसिक या दोनों। तुम एक

‘शारीरिक-मानसिक चिकित्सा परामर्श डॉट कॉम’ नामक ऑन लाइन बिजनेस शुरू कर सकते हो।”

            मैंने देखा उसका चेहरा फ्लड लाइट की तरह धीरे-धीरे चमकने लगा है। उतावला होकर उसने कहा, “और कोई आइडिया है तो उसे भी बताओ।”

            मैंने कहा, “हाँ, एक धाँसू आइडिया है।श्मशानों, बेकरियों या अन्य जगहों से तुम राख जमा कर लो। राख को महीन छानकर उसमें नमक लौंग, दालचीनी और कुछ आयुर्वेद के मसालों का चूर्ण मिलाकर सुंदर डिब्बे में पैक कर दो।संस्कृत या हिंदी शब्दकोश कोई खूबसूरत शब्द चुनो, जैसे–‘कायाकल्प’। फिर एक आकर्षक लेबिल छपवाओ।

नाम रखो ‘कायाकल्प दंत मंजन’। फिर लेबिल को डिब्बे पर चिपका दो। तुम्हारा उत्पाद तैयार। इस उत्पाद को तुम अपने घर से ऑन लाइन भी सेल कर सकते हो या किसी नामी ऑन लाइन कंपनी के साथ टाई अप कर भी सेल कर सकते हो। इसी तरह राख में सोडा और रीठा का चूर्ण मिलाकर बर्तन माँजने की टिकिया भी बना सकते हो। ध्यान यह रखना है कि प्रोडक्ट की पैकिंग अच्छी होनी चाहिए और स्टार्टअप अच्छा होना चाहिए।”

           वह मुझे मुग्धभाव से देखे जा रहा था। अचानक उसने अत्यंत श्रद्धा-भाव से मेरे चरणों पर दृष्टि डाली। मैंने अत्यंत सफाई से पैरों को शॉल से ढँक लिया। ऐसा नहीं है कि चरण छुआने से मुझे कोई परहेज है। ऐसा भी नहीं है कि इस सामंती सुख से मैं अपरिचित हूँ। दरअसल, मेरी एड़ियाँ फटी हुई थीं और मैं नहीं चाहता था कि मेरा मित्र यह देख ले।

डा. पंकज साहा

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Close Menu