अब चलते ही जाना है

पाना बस है मंजिल को
अब चलते ही जाना है ।
थकना नहीं रुकना नहीं
राहों में आये मुश्किल बड़ी
आगे – आगे कदम को रखना
दूरा नहीं मंजिल है तेरी ।
सुख आयेगा दुख जायेगा
जीवन नाम इसी का है
कर संघर्ष भरोसा इतना
एक दिन कुछ बन दिखलायेगा ।
चढ़ना भी है तुझे चढ़ाई
यात्रा इतना आसान नहीं
डरे – डरे से रहोगे तुम जब
कहने वाले कहते रहेंगे ।
मतलब उसका मत सोचो तुम
ना ही पीछे देखो मुड़
बस इतना सोचो तुम मन में
मंजिल अभी नहीं है दूर ।
पांवों को रफ्तार दो अपने
जाना अभी है कितना दूर
बुझदिल है जो सोचते ज्यादा
करते कम पछताते ज्यादा ।
नजर मिलालों उन लोगों से
आंखों में आंखों को डाल
खुद तो कुछ कर पाते नहीं है
करते हैं क्यों तुम्हें निराश ।
पाना बस है मंजिल को
अब चलते ही जाना है ।

डॉ. अर्चना दुबे

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