हम इस देश के वासी है

हम इस देश के वासी है

गन्दी बात नहीं करते हम ||
हम पक्के हिंदुस्तानी है ||
जिस देश के हम वासी है ||
वहाँ का अमृत पानी है ||

वही के सत्यवादी राजा थे ||
बिके थे तीनो प्राणी ||
सच को डिगने नहीं दिया था ||
कायम रखा वाणी ||
सतयुग त्रेता द्वापर युग की ||
अब भी वहा निशानी है ||
जिस देश के हम वासी है ||
वहाँ का अमृत पानी है ||

राजा दशरथ ने रीति निभाई ||
प्राण दिये पर वचन न जायी ||
रावण सिया को लिया चुराई ||
तब हनुमंत ने लंक जलाई ||
पानी में पत्थर जहाँ तैरे ||
राम राम के सब नामी है ||

उपदेश दिए अर्जुन को भगवन ||
भीष्म प्रतिज्ञा पूर्ण किये ||
गुरु द्रोण ने गुरु दक्षिणा में ||
एकलव्य अँगूठा माँग लिए ||
महाभारत का युद्ध हुआ और ||
पात्र कर्ण का दानी है ||
जिस देश के हम वासी है ||
वहाँ का अमृत पानी है ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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