चितचोर

चितचोर

तेरे दिल के मन मंदिर में ||
मेरा दिल जब झाँक रहा था ||
तू भी तो एक टक ही मुझको ||
छुप छुप करके ताक रहा था ||

आग बबूला हुआ नहीं तू ||
न खुश हो मै भी पायी ||
तू देख रहा था सारा नजारा ||
मै समझ गयी चतुराई ||
हंसी का जादू जब तू फेंका ||
मुझे देख खुद भाग रहा था ||
तू भी तो एक टक ही मुझको ||
छुप छुप करके ताक रहा था ||

मौका मैंने नहीं गवाया ||
चल दी उलटी चाल ||
रात में सपने दिन में मेरा ||
आयेगा तुमको ख्याल ||
मै कजरारी आँखे मचलाती ||
तू यौवन को भांप रहा था ||

बादल गरजे बिजली चमकी ||
सावन दी झकझोर ||
मै बावली तुम्हे अब ढूँढू ||
तू ही निकला चितचोर ||
मेरी याद में तू भी यारा ||
कई रातो तक जाग रहा था ||
तू भी तो एक टक ही मुझको ||
छुप छुप करके ताक रहा था ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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