उसकी यादें दिल की दरिया में घुलती जाती हैं
यादों से आँसु आँसू से आँखे धुलती जाती हैं।
गहरें से गहरें तल मे गहराती जाती यादें
उसे भुलने की कोशिश में खुद को भुलती जाती है ।।

उसकी यादों के पीर से बनती विरह की गीत है
यह तो व्यथा की रागिनी वेदना की संगीत है।
मुख पर न लाता की कहीं गल न जाए आँच से
यह तो अकथ कृष्ण को राधा की प्रीत है।।

शशि भूषण सिंह

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