देश का फौजी

देश का फौजी

कदम ताल अपनी मिलाते चले है ||
सरहद की रक्षा करते खड़े है ||
इन्होने ही है शान अपनी बचाया ||
इन्ही के तो हाथो से दुश्मन मरे है ||

तुम रात सोते बिस्तर पर जा के ||
ये रात भर खड़े हो करके ताके ||
इन्ही की दहाड़ो से संकट रुका है ||
इन्ही की बजह से पड़ोसी डरे है ||
इन्होने ही है शान अपनी बचाया ||
इन्ही के तो हाथो से दुश्मन मरे है ||

तुम ठंडी गर्मी से बच कर के रहते ||
ये हर मौसम को हंस कर के सहते ||
ललकार इनकी जग में है जाहिर ||
गर्जने पर आतंकी मूर्क्षित पड़े है ||
इन्होने ही है शान अपनी बचाया ||
इन्ही के तो हाथो से दुश्मन मरे है ||

परिवार के संग तुम ऐश करते ||
इन्ही है जो घर से बहुत दूर रहते ||
इनका लक्ष्य है सुख शांति को लाना ||
इन्ही की बजह से निकम्मे सड़े है ||
इन्होने ही है शान अपनी बचाया ||
इन्ही के तो हाथो से दुश्मन मरे है ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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