गर्मी हमको खल गयी

गर्मी हमको खल गयी

ज्येष्ठ महीना सासुर में रहना ||
मुझको मुश्किल हो गयी ||
गर्मी हमको खल गयी ||

पहिन वाराणसी साड़ी रात दिन ||
घूँघट काढ़ के रहना ||
हां जी हां जी हां जी हां जी ||
सब लोगो को कहना ||
पति देव मेरे भोले जैसे ||
मै भी उनपर मर गयी ||
गर्मी हमको खल गयी ||

बिजली कटती यहाँ बहुत है ||
गर्मी बहुत सताये ||
चौबिस घण्टे में बारह घण्टे ||
लाइट यहाँ पर आये ||
आज रात खूब चुवा पसीना ||
मै पसीने से सन गयी ||
गर्मी हमको खल गयी ||

देवर अनाड़ी बहुत चिढ़ावै ||
ननद है मारे ताना ||
सासु रानी जी गर्मी में कहती ||
चूल्हे में खाना बनाना ||
न नुकुर मै कर नहीं सकती ||
ग्रीष्म ऋतू मुझे छल गयी ||
गर्मी हमको खल गयी ||

शम्भू नाथ कैलाशी

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

Leave a Reply

Close Menu