अल्फाज नहीं हैं पास मेरे ,
हाल-ए-दिल कैसे बयां करू।
एक टीस सी उठती दिल में मेरे
तेरी याद का छाये जो शुरूर।।

बेकरारी का वो आलम है,
सांसे भी मचलने लगती है।
अश्क का दरिया बहता है,
हसरतें पिघलने लगती है।।

हो पास नहीं तुम मेरे,
दिल की दहलीज पे राह तकु।
है आस नहीं मिलने की तुमसे,
फिर भी उम्र भर इंतजार करू।।

– नेहा अवस्थी

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