सिर्फ तुम

सिर्फ तुम

तुम सामने यूं आया ना करो,
आकर फिर यूं जाया ना करो।।

हम दिल को सम्भाले रहते है,
यादों में खोये रहते है,
तुम होश में यूं लाया ना करो।।

तेरी एक झलक जो पाते है,
दीवाने हम हो जाते है,
तुम ऐसे ना मुस्काया करो।।

ये मस्त निगाहों का जादू है,
धड़कन भी मेरी बेकाबू है,
तुम यूं नजरें ना मिलाया करो।।

तेरे इश्क में दुनिया भूले है,
खुद से भी अनजाने है,
तुम ऐसे ना तड़पया करो।।

तुम सामने यूं आया ना करो,
आकर फिर यूं जाया ना करो ।।

-नेहा अवस्थी

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Golden Ray A Sunahri

-होम्योपैथिक चिकित्सक -रेकी मास्टर -कविता लेखन

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