आया था वो मांगने, उससे अपना प्यार
चल मेरे अभी साथ तू, तुझ पे दूंगा सब कुछ वार

परदे की ही ओट में वो खड़ी रही सकुचाई
बोली अब ये अधर्म है, इसमें नहीं कोई अच्छाई

वो बोला मैं प्यार हूँ तेरा, हुआ तेरे संग घात
जबरन तुझको बांधा है, उस प्राणी के साथ

बांधा होगा जबरन ही, मुझको उनके साथ
पर उन्होंने तो नहीं किया, कोई भी गुनाह

मैं कहता हूँ बात ये, योग्य नहीं वो तेरे
मेरे संग जो आएगी दिन बदलूंगा तेरे

नहीं मुझे कोई चाह है, दिन मेरे यूँ बदले
मैं इनके साथ ही खुश हूँ, यही परमेश्वर मेरे

जैसा तुझको ठीक लगे, वैसा निर्णय ले
हे परमात्मा प्यार मेरे को, ढेरो खुशियाँ दे

चला गया वो अपनी राह, छोड़ उसे उसके हाल
देख हुआ संतोष उसे, प्रियतम को मिल गया उसका प्यार

वो थी प्रसन्न बहुत, अपनी गृह- गृहस्थी में
चला गया वो भूल उसे, खुश है अपनी हस्ती में

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