आवाहन

आवाहन

आओ भाई आओ,  आओ सब आओ
मिलकर सब अपना शोषण करवाओ

क्या कहा! नहीं करवाओगे ?
पर इससे अब बच नहीं पाओगे
जीना है तो शोषण करवाना पड़ेगा
कड़वा जहर है, इसको पीना पड़ेगा

बन गई है अब तो सरकार नई
अच्छे दिन आने की उम्मीद बढ़ी
पर अच्छे दिन ऐसे कभी नहीं आयेंगे
जो जैसे है वो वैसा ही रहेगा

पच्चीस दिखा के पाँच ही देंगे
उसमे से भी
जितना चाहे उतना काट लेंगे

जानते तो सभी है
पर कुछ नहीं करते
अगर कुछ करेंगे तो

इससे भी जायेंगे

अपने हक़ के लिए लड़ना
पंगा होता है यहाँ
चुप करके सहना

लक्षण समझदारी का

एक चुप सो सुख
इसको तुम जान लो
विरोध करने वाले को
सिर से ही काट दो

हमारा नमक खा कर
हम पर ही चिल्लाते हो
हमारे भयभीत श्रमिकों को
हमारे खिलाफ भड़काते हो

अब आपकी जरुरत नहीं

हमारे संस्थान को
आप वहाँ जाओ
जहाँ मालिक ईमानदार हो
हमे क्या कमी है
पढ़े-लिखे ऐसे बेरोजगारों की
जो चुप करके मानेगे
हमारी नियमावली

जीना है तो सीख लो
हाँ में हाँ मिलाओ
जितना भी हम दे दे
उसमे खुश हो जाओ

आज मैं समझ गई
मुँह को बंद रखना है
शोषक सही है हमेशा
यदि पेट भरना है

शोषक जो  भी कहे
बस वो सही है
श्रमिक को सहना है
उसका धर्म यही है

नौकरी जो की है

नखरा न दिखाओ

आठ घंटे अब हमारे
हमे न आँख दिखाओ

आठ घंटे के भी बाद
हम काम लेंगे
पर आपको एक भी घंटा
हम कभी भी न देंगे

जो ये सलाह मानेगा
वो टिक जाएगा
पंगे वाला तो हमेशा
दर दर ठोकर खाएगा

आखिरकार कब तक

हम ये सहेंगे

अभी ओर कितने वक़्त
खामोश रहेंगे

तोड़ दे ये अब ख़ामोशी
इसमें कुछ न रखा है
इससे केवल शोषक का
हौसला बढ़ेगा

आप जो करोगे
बच्चे वही सीखेंगे
क्या वो भी पढ़लिख कर
अनपढ़ ही रहेंगे

नहीं! नहीं!
ऐसे राष्ट्र का निर्माण नहीं करना
जो अपने हको के लिए
लड़ भी नहीं सकता

अपनी मेहनत की खाने में
डरना किस बात का
आओ सब मिल आओ
निर्माण करे एक साक्षर राष्ट्र का

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