माँ तू मन ही मन मुस्काये लाल तेरा हर्षित हो जाये ।
मेरी किलकारी अब धरा गगन नभ में सुनाये ।
आँचल से तेरे अब तो बादल भी लज्जित हो जायें ।
लोरी से तेरी अब तो सातों सुर तान मिलायें ।
माँ तू मन ही मन मुस्काये लाल तेरा हर्षित हो जाये ।

– देवी शंकर यादव

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