जीने की राह

जीने की राह

है अभिलाषा जीने की तो ॥
पर्वत से टकराना होगा ॥
अभिमान कभी न आने देना ॥
लालच क्रोध मिटाना होगा ॥

चलते रहना अपने पथ पर ॥
संघर्ष से पीछे मत हटना ॥
धक्के बहुत लगेंगे तुमको ॥
हठ करके तुम वही पे डटना ॥
अपनी इच्छा शक्ती को खुद ॥
अपने अंदर जगाना होगा ॥
अभिमान कभी न आने देना ॥
लालच क्रोध मिटाना होगा ॥

लोक लाज सब जांच परख के ॥
अपना कर्म निछावर करना ॥
भिड़े गे तुमसे अन्यायी जब ॥
बिल्कुल उनसे तुम न डरना ॥
अन्याय की वेदी पर तुमको ॥
सच का दीप जलाना होगा ॥
अभिमान कभी न आने देना ॥
लालच क्रोध मिटाना होगा ॥

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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