माँ

माँ

मुख मण्डल मुरझाने पर ||
देख हमे रोती थी माँ ||
आँचल में छुपा के सोती थी माँ ||

ठुमक ठुमक जब मै चलता था ||
बजती थी पैजनियाँ ||
माँ बलइया खूब लेती थी ||
चढ़ जाता मै कनियाँ ||
छींक मुझे जब आने लगती ||
हाथो से अपने धोती थी माँ ||
आँचल में छुपा के सोती थी माँ ||

बुकवा तेल जब लग जाता था ||
फिर लगता माथ में टीका ||
नजर कही मुझे लग न जाये ||
न तेज पड़े कुछ फीका ||
रात नींद से जाग जाग के ||
स्तन पान कराती थी माँ ||
आँचल में छुपा के सोती थी माँ ||

संस्कार का पाठ पढ़ाती ||
देती अच्छी शिक्षा ||
सारी ममता मुझपे लुटाती ||
कुछ न रखती इक्षा ||
झाड़ पोछ कर पल पल मुझको ||
हाथो से अपने सजाती थी माँ ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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