वक़्त की कश्ती ख्वाबों का सहरा
उस पर दुनियां का हर पल पहरा
लाख ज़माना कर ले साजिशें
मोहब्बत का रंग है बहुत गहरा
ना जाने लोग कब समझेंगे क़ीमत प्रीति की
कब बंद करेंगे सियासत गंदी राजनीति की
हिन्दू-मुस्लिम, जात-पात, ऊँच-नीच
सब हैं सिर्फ़ इनकी चालों का मोहरा
वो क्या महसूस करेंगे साफ़ दिल के सुकून को
जिनके दिल का रंग है स्याह गहरा……

आरती ‘अक्स’

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