शश ….प्रशासन सो रहा है.

शश ….प्रशासन सो रहा है.

चाहे जितनी बार कर लो आप कैंडल मार्च,
और लेकर हाथ में जलती हुई मोमबतियां
चाहे अपने बिछड़े बच्चों की याद में ,
फूँक डालो हज़ार अगरबत्तियां,
असंख्य माताओं-पिताओं की गोद से,
यूँ ही सदा छिनती जाती रहेंगी मासूम गुड़ियाँ।
ना कोई सुनवाई होगी, ना ही मिलने वाली है सज़ा -ऐ मौत
वेह्शी दरिंदों को, बेकार है कानून की देना दुहाईयाँ।
एक मासूम, अबोथ कलि कुचली गयी, और दूसरी तैयार,
समाचार पत्र में तो बदलती ही रहती हैं रोज़ सुर्खियाँ।
आखिर इंसाफ की पुकार करें तो किस से करें?
हमारे देश का प्रशासन तो ले रहा है नींद में मस्ती की अंगड़ाईयाँ.

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ओनिका सेतिया 'अनु'

संक्षिप्त परिचय नाम -- सौ .ओनिका सेतिया "अनु' , शिक्षा -- स्नातकोत्तर विधा -- ग़ज़ल, कविता, मुक्तक , शेर , लघु-कथा , कहानी , भजन, गीत , लेख , परिचर्चा , आदि।

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