मन

मन

न मै मटका न ओ मटकी ||
न मै भटका न ओ भटकी ||
गगन चूमने की ख्वाहिश ||
अधूरी रह गयी ||
जहाँ मै अटका वहाँ ओ अटकी ||

हुस्न का इजहार हुआ ||
आँखे मचलाने लगी ||
सागर में समाने की ||
मुराद भी पूरी हुई ||
झूम के सावन बरसा ||
कूद कूद खुशियाँ झटकी ||

तरक्की कर वीराना बाग़ ये ||
सजी क्यारी भी है और ||
फूल भी मकहते है ||
यादगार बना सुहाना पल ओ ||
न मै खटका न ओ खटकी ||

शम्भू नाथ कैलाशी

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शम्भनाथ

पिता का नाम स्वर्गीय श्री बाबूलाल गाँव कलापुर रानीगंज कैथौला प्रतापगढ़ उत्तर-प्रदेश जन्म ०७/०८/१९७४ शिक्षा परानास्तक पुस्तकालय विज्ञानं पेसा नौकरी

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