लहरों की तरह चट्टानों से टकराकर
चूर हो जाना आता है ..
हमेशा फ़क़त पूनम के चाँद का सा
रौशन ही नही ..
अमावस की स्याह रात में टूटते तारे सा
बेनूर हो जाना आता है..
ज़रूरी नही ज़िन्दगी में हमेशा
खुशियां ही मिलती रहें..
ग़म में भी आँखों में अश्क़ लिए
लबों से मुस्कुराना आता है..
जिद्दी हूँ सनकी हूँ बेपरवाह हूँ
मग़र ख़ुदगर्ज़ नही..
मोमबत्ती की तरह मुझे भी
जलकर पिघल जाना आता है..
हाँ मुझे जीना आता है…..

आरती ‘अक्स’

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